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Why change caste based reservation? आरक्षण में परिवर्तन क्यों?

क्या भारत में जरुरत है की अब जातिगत आरक्षण (caste based reservation) के नियम में परिवर्तन किया जाये?

एक समय था जब सरकारी नौकरी करने के लिए कोई व्यक्ति तैयार नहीं होता था. सरकार को लोगों को लालच देकर और जबरन ही नौकरी करने के लिए मजबूर करना पड़ा था.

पहले के ज़माने में लोग मस्तमौला हुआ करते थे, लोग ज़िन्दगी को मज़े में जीना चाहते थे और भविष्य की कोई ज्यादा चिंता उन्हें नहीं होती थी, इसलिए नौकरी करके वो कोई दबाव वाली ज़िन्दगी नहीं जीना चाहते थे. यही वजह थी की सरकारी विभागों में काम बड़ी आराम से चला आ रहा है, काम हो रहा है तो हो वरना नौकरी से कौन निकाल देगा. वही सरकारी विभाग के कार्यों में घूसखोरी और रिश्वत के मामले भी बहुत देखे जाते हैं.

सरकार ने निम्न वर्ग के लोगो के कल्याण के लिए उन्हें सरकारी नौकरी में आरक्षण देने का नियम लागु किया ताकि वे अपना और अपने परिवार का भविष्य निर्माण कर सकें, पर यदि आप अपने आस पास ध्यान से देखें तो आप पाएंगे की कई साल से सरकारी नौकरी करने वाले निम्न वर्ग के लोगो के बच्चे सही से शिक्षित भी नहीं हैं. जबकि उनके परिवार की आय एक प्राइवेट नौकरी करने वाले साधारण परिवार की आय से अधिक है.

आरक्षण के नियम में किसी भी सरकारी भर्ती प्रक्रिया में जातिगत आरक्षण का प्रतिशत निर्धारित है जो की अनुसूचित जाती के लिए 15%, अनुसूचित जनजाति के लिए 7.5% तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27% का प्रावधान किया गया है. बाकि बची 51.5% सामान्य वर्ग के लिए रहती हैं. लेकिन इसमें भी एक नियम है यदि कोई अनुसूचित जाती, जनजाति या अन्य पिछड़े वार्ड का कोई उम्मीदवार अच्छे अंको से उत्तीर्ण है तो वह सामान्य वर्ग की सीट पर भर्ती प्राप्त कर सकता है.

सरकार की सोच सही है वह निम्न वर्ग का कल्याण करना चाहती है, परन्तु क्या उनकी सोच सही है जिनको इसका लाभ मिल रहा है. कम योग्यता से पास होकर भी नौकरी का मिल जाना, क्या ये नहीं लगता की यही उन लोगो की तरक्की में बाधक है, क्योकि उनको लक्ष्य ही छोटा दिया जा रहा है तो वो आगे निकलने का सोचेंगे ही क्यों।

आरक्षण के नियमों में ये बदलाव किये जा सकते हैं।

  • निम्न आय वर्ग के लोगो के लिए शिक्षा मुफ्त कर दी जानी चाहिए। निम्न आय वर्ग किसी जाति विशेष का नहीं होता, एक सामान्य वर्ग का व्यकि निम्न आय वाला हो सकता है और एक पिछड़ा वर्ग का व्यक्ति उच्च आय वाला हो सकता है।
  • यदि आरक्षण देना ही है तो सभी प्रकार की शिक्षा और शिक्षण संस्थानों में शिक्षा को निम्न वर्ग के लिए मुफ्त में उपलब्ध कराया जाये।
  • लक्ष्य का निर्धारण जातिगत नहीं होना चाहिए, शिक्षा की गुणवत्ता और उसके परिणाम में समानता वाला नियम होना चाहिए।
  • कुछ अति संवेदनशील विभागों में आरक्षण नहीं होना चाहिए जहाँ बिलकुल परिपक्व दिमाग के साथ त्वरित निर्णय की जरुरत हो, वहां सिर्फ गुणवत्ता के आधार पर ही पद मिलना चाहिए।

सरकार यदि इस प्रकार का प्रावधान करती है, तो इस से देश को अच्छे निर्माणकर्ता प्राप्त हो सकते हैं, और यह देश की तरक्की के लिए आवश्यक है।

अपने विचार नीचे दिए बॉक्स में लिख सकते हैं, और इसे शेयर भी कर सकते हैं।

6 Responsesso far.

  1. Jack says:

    Yes aarkanshan khatam ho jaana chahiye

  2. David says:

    I agree with your thoughts

  3. Rahul says:

    Aarakshan poori tarah band hona chayiye

  4. Himanshu Singhal says:

    Desh m jab sab ek saman h to sabhi k sath ek saman achran hona chaiye or aarkshan jaruri logo ko he dena chaiye

  5. Prachi sharma says:

    Arkshan yogyata ke anusaar dena chahiye ..bhale hi fir wo kisi bhi cast ka ho ..jo kabil hai usko help deni chahiy

  6. Mahesh says:

    Yes. India me aarakshan khatam hona chahiye. Aur jo sahi insaan hai usko job milna chahiye. Aarakshan ka faayada dusri tarah se bhi diya ja sakta hai.

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